Reality of Bollywood | Why Sushant Singh Rajput Suicide?

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अक्सर जब राजनीति जैसे शब्द का जिक्र होता है तो दिमाग में सफेद कपड़े और सर पर लंबी टोपी लगाए कुछ महापुरुष अपने आप प्रकट हो जाते हैं लेकिन हकीकत में यह तो बस नाम के लिए बदनाम है पॉलिटिक्स की सबसे तेज आंधी चलती है मायानगरी मुंबई में जहां पर फिल्म इंडस्ट्री नाम का राक्षस धीरे-धीरे मजबूर लोगों के सपने और आखरी में उनकी जिंदगी को गुनगुने जोड़ लेता है सुशांत सिंह राजपूत एक टैलेंट से भरे हुए कलाकार के बिना किसी के सपोर्ट पर सिर्फ अपने मेहनत के दम पर फिल्म इंडस्ट्री के मशहूर करने वाले ऐक्टर से कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हुए थे और वह इस दुनिया को अलविदा बोल चुके हैं। लेकिन दिल पर पत्थर रखकर मैं आपको बता दूं कि सुशांत पहले नहीं थे और शायद आखरी भी नहीं होंगे। कारण कारण हजारों हैं  जिनको शब्दों में उतारना असंभव है। लेकिन कुछ बातें हैं जो घटिया पनती की सारी सीमाएं लांग चुकी है और उनके पीछे बैठे हुए लोगों की खाल खींचना काफी जरूरी हो गया है। वक्त आ गया है कुछ लोगों के चेहरों के ऊपर से नकाब उतारे जाएं और उन को आईना दिखाया जाए।  आज से मैं आपके सामने 10 ऐसे प्वाइंट्स रखने वाली हूं। तो यह बात साबित कर देंगे कि बाहर से हीरे की तरह चमकने वाली फिल्म इंडस्ट्री हकीकत में कीचड़ से भरा हुआ एक दल दल है। जो मासूम लोगों को अपनी तरफ खींच कर खुद उनको अपनी जान का दुश्मन बना देता है। 




    १) नेपोटिस्म 

     पहला रीजन है नेपोटिज्म दूसरे हमारे देश में सिनेमा की जमीन को खोखला कर दिया है और टैलेंट से भरे हुए एक्ट्रेस के मुंह पर तमाचा मार कर उनको उस सबसे से दूर कर दिया है जिसके लिए को सालों साल ईडियट्स कर मेहनत करते हैं। जरा सोच कर देखिए आप पढ़ाई में बहुत तेज है और कंधे पर किताबों से भरा हुआ एक बैग लेकर पूरे साल स्कूल जाते हो। लेकिन एग्जाम के टाइम पर टीचर जानबूझकर आपको बिना पेपर दिए ही वापस घर भेज दे और अपने खुद के बेटे को बिना एक शब्द लिखिए क्लास में सबसे ज्यादा नंबर बांट दें तो आपको कैसा लगेगा। ठीक वैसे ही फिल्म इंडस्ट्री में कुछ एक्टर को नई नई फिल्में थाली में सजाकर परोसी जाती है।  तो वहीं दूसरे को ऑडिशन तक देने का मौका नहीं मिलता जिसके खिलाफ आवाज उठाते हैं उनको पागल घोषित कर दिया जाता है। या फिर काला जादू का इल्जाम लगा देते हैं। 


    २) ड्यूल नेचर 


        शुद्ध भाषा में बोलूं तो दोगलापनती।  कुछ मशहूर प्रोड्यूसर्स है जिनकी जेब काफी मोटी है और उससे भी ज्यादा मोटी हो चुकी है। यह अपनी दुनिया के राजा है और बाकी सब इनके लिए कीड़े मकोड़ों के बराबर हैं। आयुष्मान खुराना ने अपनी बुक में किस्से का जिक्र किया है जब स्ट्रगल वाले दिनों में उनको करण जोहर की ऑफिस का नंबर देकर बोला गया था कि आपका कैरियर सेट हो चुका है। अगले दिन फोन किया तो जवाब मिला कि नंबर गलत है। दूसरी बार मिलाया तो बोला गया कि दूसरे साहब बिजी हैं। बाद में मिलाना और तीसरी बार जवाब मिला कर हम सिर्फ स्टार्स  के साथ काम करते हैं। लेकिन मेहनत के दम पर फिल्मी दुनिया का मशहूर नाम बन गए तो करण साहब ने खुद को शो पर बुलाकर सुन का ऑफर दिया। जिसको आयुषमान ने हंसते-हंसते मना कर दिया कारण आप समझ ही गए होंगे। आपके नाम के साथ तुमको छोड़कर फायदा नहीं होगा तो प्रड्यूसर साहब आपको चाय पर बैठे वाली मक्खी की तरह उड़ा देंगे। लेकिन अगर आपका नाम बिकता है तो वह खुशी-खुशी उसी चाय को पीने के लिए तैयार हो जाएंगे।  


    ३) मीडिया  


    तीसरा  रीजन है हमारे देश की नैया डूबने वाली मीडिया जो आज की खबरें दिखाती कम और बनाती ज्यादा है। कौन सा स्टेशन में किस टंकी पानी की बोतल लेकर जाता है।  किसके बच्चे ने आज मुझसे पहला शब्द बोला या फिर किसने पहली बार किचन में बर्तन धुले यह की खबरों की हेडलाइंस होती हैं। लेकिन एक चीज गौर की है खबरों में दिखते वही हैं जिनके नाम के पीछे कपूर, खान होता है बाकी बाजपेयी, सिद्दीकी, हुड्डा से इनको कोई लेना देना नहीं है। क्या सोच रहे हैं ऐसा क्यों जवाब है हरे रंग वाला नोट जिससे इनका धंधा चलता है। इसके बदले ही जेनरलिस्म के आड़ में प्रमोशन की दुकान चलाते हैं और कुछ मामूली आज तक को लोगों के बीच में भगवान बना देते हैं। 


    ४)कनेक्शंस  


    चौथा रीजन है कनेक्शन सयानी चमचागिरी जिसके सहारे फिल्मों में एंट्री करने के नए नए रास्ते तलाशने की कोशिश की जाती है। फर्क बस इतना है कि अगर आप किसी एक्टर के बेटे हैं तो आपको इज्जत के साथ ऑफिस में बिठाकर कहानी सुनाई जाती है। लेकिन अगर आप बाहर वाले हैं और फिल्मों में काम करना है तो पहले बंद कमरे के अंदर आपको इशारों पर नचाया जाएगा। जिसमें शरीर और दिमाग दोनों को नोच लिया जाता  है।  फिर भी अगर आप आवाज उठाने की हिम्मत दिखाते हैं और गलत को पूरी दुनिया के सामने लेकर जाते हैं तो आपका करें और हमेशा हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा। और फिल्म इंडस्ट्री से आपको छुआछूत की बीमारी समझ कर दिया जाएगा। 


     ५) अवार्ड्स  


    पांचवा रीजन है अवॉर्ड्स  जिसको किसी भीएक्टर की फिल्म इंडस्ट्री में सफलता नापने का हथियार माना जाता है। लेकिन हकीकत में एक इसी धंधे से कम नहीं है। पूरा प्रोसेस आपको आसान शब्दों में समझाती हूं देखो अवार्ड कराने वाला होता है। जो अपनेपन से जुड़े हुए लोगों को मुफ्त में अवार्ड बांटता है। जजेस भी वही होते हैं जो उनके साथ जुड़े हुए हैं। मानिए फिल्मफेयर  ऐमेज़ॉन ने कराया तो गरीब और को तेरा अवार्ड मिल गए सीक्रेट आप जानते ही हैं।  


    दूसरी कलाकारी है अपने मन से बनावटी कैटेगरी बनाकर मार्केट के हाथों में चमचमाती ट्रॉफ़ी पकड़ा ना।  जिसके साथ सेल्फी खींचकर इंस्टाग्राम पर अपलोड कर देंगे बच्चे नाराज हो गए तो कल को फिल्मों में काम कौन करेगा। जरा इन से पूछिए सुशांत ने जो कारनामा एम एस धोनी बनकर पर्दे पर दिखाया था उसके बदले में उनको एक वोट नहीं दिया जा सकता था। अगर जवाब ना है तो पर डिक्शनरी से अवार्ड नाम का शब्द हमेशा हमेशा के लिए मिटा दीजिए। 


    ६) फेक रिस्पेक्ट 


    छटा रीजन उधार वाली इज्जत जिसके बिना मुंबई में काम तो छोड़िए कोई आपकी तरफ तो देखने की कोशिश तक नहीं करेगा। अगर तुमने में काम करना है तो आपके पास अच्छा खासा बंगला होना चाहिए। प्रोड्यूसर से मिलने जाओ तो बड़ी महंगी कार से उतरना पड़ेगा और हां पार्टी करने शहर  के सबसे महंगे क्लब नहीं गए तो आप लाइन के काबिल नहीं है। यह सब दिखावे वाला खेल अब एक्टर्स की जरूरत बन चुका है जिसके बिना आपको पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया जाएगा। पैसे नहीं है तो फिर उधार मांगी है बैंक से लोन लीजिए हां लेकिन वापस चुकाने के लिए आपको काम मिलेगा इसकी कोई गारंटी नहीं है। 


    ७) टीवी शो  


     सातवा रीजन है  टीवी शो जो कहने के लिए तो सिर्फ एंटरटेनमेंट के लिए बनाए जाते हैं लेकिन हकीकत में इनका इस्तेमाल अपने अंदर छुपे हुए भड़ास निकालने के लिए किया जाता है। कॉफ़ी के बहाने आपसे पूछ लिया जाएगा कि पलाना एक्टर तुमसे बेकार क्यों है वह पार्टी में गरीबों से कपड़े क्यों पहनता है या फिर किस तरह को इंग्लिश बोलने में अटकता है। उस पर मजेदार चुटकुले बनाए जाते हैं। कमाल की बात यह है कि इन सबका मकसद एंटरटेनमेंट बिल्कुल नहीं है। बल्कि अपने चुनिंदा दोस्त या फिर उनके बच्चों को पॉपुलर बनाने का एक शॉर्टकट तरीका है जिसमें एक एक्टर को नीचा दिखा कर दूसरे को बेहतर साबित किया जाता है। 


    ८) स्टारकिड्स vs आउटसाइडर्स 


    आठवा रीजन स्टार किड्स वर्सेस आउटसाइडर वाली जंग जिसमे अक्सर छोटे शहर से बाहर आए लोगों को दरवाजे पर लगी हुई दीमक की तरह देखा जाता है और फिर मैं तो छोड़िए कोई उसे हेलो है करना भी खुद की बेज्जती समझता है। सोचिए जब रवीना टंडन जैसी पॉपुलर एक्ट्रेस खुलकर इस बात का जिक्र करें कि किस तरह अजीबोगरीब नामों से बुलाकर उनका मजाक उड़ाया जाता था। बीचमे ही उनको किसी भी फिल्म से निकाल दिया जाना या फिर झूठ खबर चलाकर उनकी पर्सनल इमेज खराब करना तो फिर छोटे पर्स कैसे नर से गुजरते होंगे यकीन मानिए आउटसाइड खिलौने की तरह समझा जाता है जिनको आसमान तक के सपने दिखाए जाते हैं और कम पैसों में फिल्में करवा कर अपना काम निकाला जाता है। उसके बाद उनका फोन उठाना बंद कर दिया जाएगा। ऑफिस में नो एंट्री का बोर्ड लगा देंगे। फिर भी ट्वीट करके पूछते हैं कि आखिर डिप्रेशन हुआ कैसे एक बार बताया तो होता।  थोड़ी शर्म करिए कम-से-कम इंसानियत के खातिर मुंह बंद कर लीजिए। 


    ९) फ्यूचर  


     नउवा रीजन जुड़ा हुआ है फिल्मी करियर के फ्यूचर यानी भविष्य को लेकर एक ऐसा सवाल जो हर उस इंसान को अंदर से पूछता रहता है। उसकी पूरी जिंदगी से कमाए गए पैसों पर टिकी हुई है ना कि दादा परदादा की तिजोरी पर।  अगर आपके नाम के पीछे मशहूर सरनेम नहीं लगा हुआ है तो हर दूसरी फिल्म\ मैं आपको अपना टैलेंट साबित करना पड़ेगा अगर एक  फ्लॉप हो गई तो आपके करियर पर फुलस्टॉप लग जाएगा। टीवी केयर तक में 1 सेकंड का रोल नसीब नहीं होगा। वहीं अगर आप कपूर खानदान से है तो फिर आप बिना हिट फिल्म्स दिए सिर्फ फ्लॉप्स देते जाइए उसके बावजूद आप का भविष्य सूरज की तरह चमकता रहेगा। या फिर गुंगा बनकर बिना डायलॉग बोले भी आप सेलिब्रिटीज वाली रेस में दौड़ते रहेंगे। 


    १०) ऑडियंस 


    दसवा रीजन किसी और के साथ नहीं बल्कि हम लोग यानी ऑडियंस के साथ जुड़ा हुआ है। जो घटिया से घटिया फिल्म को 200 करोड़ की कमाई करा देती है। और अच्छी से अच्छी फिल्म को २  करोड़ भी नसीब नहीं होते। जब मेहनत से बनाई गई फिल्म  बुरी तरह पिट जाती है और टैलेंटेड डॉक्टर के माथे पर क्लॉक का स्टीकर लगाया जाता है। तो उसका दिमाग किस हादसे का शिकार होता है उसका अंदाजा लगाना भी नामुमकिन है। अगर जुड़वा-2 जैसी 130 करोड़ से भी ज्यादा की कमाई कर ले और सोन चिड़िया जोशी मास्टर पीस सिर्फ चार करोड़ में सिमट जाए तो समझ लीजिए कि तुम से जुड़े हुए एक्टर्स फेल नहीं हुए हैं 100 में से 0 नंबर हम लोगों के हैं। जो अनजाने ही एक अपराध में शामिल हो गए। 


    उम्मीद करती हूं आप इस आर्टिकल का असली मकसद समझेंगे और बहरी हो चुकी फिल्म इंडस्ट्री के कान में इन सवालों के शोर को पहुंचा देंगे।


    सौजन्य:- दिक्षा शर्मा , फिल्मी इंडियन 


    व्हिडिओ लिंक:- https://www.youtube.com/watch?v=wOXM5Tq_EJE


    English Translation



    Reality of Bollywood. Why Sushant Singh Rajput Suicide?


     Note: This comment will be given by the YouTube channel Filmy Indian


    Often when a word like politics is mentioned, some of the great men appear in their minds with white clothes and long caps on their heads, but in reality, it is just a bad name for politics. But the monster named the film industry gradually adds to the dreams of forced people and their lives lukewarm in the last. He stood shoulder to shoulder with the actor and has said goodbye to this world. But let me tell you by placing a stone on my heart that Sushant was not the first and probably will not be the last. There are thousands of reasons which are impossible to put into words. But there are some things which have all the limits of poor husbandry and it has become very important to pull the skin of the people sitting behind them. The time has come to remove the mask from the faces of some people and show them the mirror. Today, I am going to put 10 such points in front of you. So it will prove that the film industry shining like a diamond from outside is in reality a party filled with mud. Which draws innocent people towards themselves and makes them enemies of their lives.





    1) Nepotism 


     The first region is nepotism, the second has hollowed out the land of cinema in our country and by slapping the talent-filled actress in the mouth, she has been removed from the most for whom she has worked hard for years. Just think that you are very fast in studies and go to school for a whole year with a bag full of books on your shoulder. But at the time of the exam, the teacher willfully send you back home without giving you the paper and write a word to your own son without dividing the highest number in class. In the same way, some actors in the film industry are served by decorating new films in the thali. So at the same time, the other does not get an opportunity to give an audition, against whom those who raise their voices are declared insane. Or put the charge of black magic.



    2) Dual Nature 


        If I speak in a pure language, it is hypocrisy. There are some famous producers whose pockets are quite thick and have become even thicker. He is the king of his world and everyone else is equal to insects. Ayushman Khurana mentions an anecdote in his book when he was told by Karan Johar's office number in Struggle days that your career has been set. I called the next day and got an answer that the number is incorrect. When mixed for the second time, it was said that the other sir is busy. We only work with the stars, joining later and getting answers for the third time. But on the basis of hard work, when the film became a famous name of the world, Karan Sahib called himself on the show and offered to listen. You must have understood the reason for which Ayushmann refused laughingly. Leaving you with your name will not help, then the producer will blow you like a fly sitting on tea. But if your name is sold, then they will be ready to drink the same tea happily.




    3) Media 


    The third region is the sinking media of our country, which shows less and more of the news of today. Which tank carries the water bottle in the station. Whose child said the first word to me today or who washed the dishes in the kitchen for the first time, the news headlines are there. But one thing to be noted is that those who appear in the news are the ones whose names are followed by Kapoor, Khan and the rest have nothing to do with Bajpayee, Siddiqui, Hooda. What are you thinking, why is the answer like green note which runs their business? Instead, they run a promotion shop under the guise of generalism and some minor people make God among the people till today.




    4)Connections 


    The fourth region is Connection Sayani Chamchagiri with the help of trying new ways to enter films. The only difference is that if you are the son of an actor, you are told the story by sitting in the office with respect. But if you are an outsider and have to work in films, then inside the first closed room you will be made to gesture. In which both body and mind are scratched. However, if you show courage to raise your voice and take the wrong in front of the whole world then do it and it will end forever. And the film industry will make you understand untouchability.


     5) Awards 


    The awards are the fifth region, which is considered to be the weapon to measure success in the film industry of any actor. But in reality, it is nothing less than this business. Let me explain the whole process in easy words. Look is rewarding. One who distributes the award free of cost to the people connected with belonging. Judges are also those who are associated with them. Suppose the Filmfare was made by Amazon, then poor and Ko got your award, you know the secret.


    The second art form is by creating an artificial category with your mind and not holding the glittering trophy in the hands of the market. With which children will pull selfie and upload it on Instagram if the children get angry then who will work in films tomorrow. Just ask these, they could not be given a vote in exchange for the feat that Sushant had shown on the screen by becoming MS Dhoni. If the answer is no, then delete the word name from the dictionary forever.




    6) Fake  Respect 


    Without due credit, without respect, leave work in Mumbai, no one will even try to look at you. If you have to work, then you must have a good bungalow. If you go to meet the producer, you will have to get down from a very expensive car and if you do not go to the most expensive club in the city to party, then you are not capable of the line. All this show of play has become a necessity for actors without which you will be completely ignored. If there is no money, then you have asked for a loan, take a loan from the bank, but there is no guarantee that you will get work to repay it.




    7) TV Shows 


    Seventh Region is a TV show that is made for entertainment only, but in reality, they are used to remove the anger that is hidden inside them. On the pretext of coffee, you will be asked why the Palana actor is useless to you, why does he wear clothes from the poor in the party or how is he stuck in speaking English. Funny jokes are made on it. The amazing thing is that all this is not the purpose of entertainment at all. Rather, it is a shortcut way to make your selected friend or their children popular in which one actor is proved to be better than the other by degrading one actor.




    8) Starkid's  vs Outsiders 


    The battle with the Eighth Region Star Kids Versus Outsider, often seen by people coming out of the small town like a termite at the door, and then I leave it to someone who is a halo, also considers himself unbecoming. Imagine when a popular actress like Raveena Tandon would openly mention how she was used to making fun of them by calling them with peculiar names. In the meantime, if they are removed from any film or spoil their personal image by running false news, then how will the small purse pass through the male. Believe it is considered as an outdoor toy, which is shown dreams up to the sky and in less money. Films get their work done. After that, his phone will be stopped. Will put a board of no entry in the office. Still, tweeting and asking how the depression had happened once would have been told. Be a little shy, at least close your mouth for the sake of humanity.




    9) Future 


     Ninth Region is connected to the future of the film career, a question that keeps asking every person from inside. His entire life rests on the money earned, not on the coffin of grandfather. If there is no famous surname behind your name, then every other film, I will have to prove my talent. If a flop is done then your career will be a full stop. There will be no 1-second role in TV Care. On the other hand, if you are from the Kapoor clan, then you give flops without giving hit films, despite that your future will continue to shine like the sun. Or you will continue to run in the race of celebrities without speaking the dialog by becoming Gunga.




    10) Audience 


    The tenth region is not associated with anyone else but with the people. Which makes a cheap film from a cheap to 200 crores. And even the best films do not get 2 crores. When a hard-made film is badly beaten, a clock sticker is placed on the forehead of the talented doctor. So it is impossible to guess what kind of accident his mind is. If you earn more than 130 crores like twin-2 and Son Chidiya Joshi's masterpiece is reduced to only four crores, then understand that the actors associated with you have not failed, we are number 0 out of 100. Who inadvertently became involved in a crime.




    I hope you will understand the real purpose of making this video and will send the noise of these questions to the ears of the deaf film industry, apart from this, I do not want to say anything else.


    Courtesy:- Diksha Sharma, Filmy Indian YouTube Channel


    video link:- https://www.youtube.com/watch?v=wOXM5Tq_EJE



    Reality of Bollywood | Why Sushant Singh Rajput Suicide? Reality of Bollywood | Why Sushant Singh Rajput Suicide? Reviewed by Rudr Patil on June 18, 2020 Rating: 5

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